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मैं कविता नाहीं अहसास लिखरही हूँ आज़ तुम्हारे लिए वो अल्फ़ाज़ लिखरही हू जब मैं तुमसे मिली तुम कुछ ख़ास लगे जिसकी क़भी ख्वाहिश ना थीं वो अहसास लगे अजनबी से तुम पहचान बंगाए ओर धीरे धीरे फिर मेरी जान बंग़ाए ❤️तुम्हारी सबा❤️
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